बिहार: 'समान काम समान वेतन' मामले पर शिक्षकों का बढ़ा इंतजार, 7 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

बिहार: 'समान काम समान वेतन' मामले पर शिक्षकों का बढ़ा इंतजार, 7 अगस्त को होगी अगली सुनवाईपटना/दिल्ली.बिहार में नियोजित शिक्षकों के 'समान काम समान वेतन' मामले पर गुरुवार को बिहार और केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा दिए गए हलफनामे पर चिंता व्यक्त की। केंद्र सरकार का कहना है कि बिहार और उत्तरप्रदेश में आर्थिक समस्या थोड़ी ज्यादा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि दूसरे विभाग जैसे-स्वास्थ्य, पुलिस और अन्य विभागों में आर्थिक समस्या नहीं है। सिर्फ शिक्षकों के मामले में ही आर्थिक समस्या कैसे शुरू हो जाती है। फिलहाल इस मामले केंद्र सरकार 7 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में अपनी दलील रखेगी। जस्टिस एएम स्प्रे और जस्टिस यूयू ललित की पीठ मामले की सुनवाई कर रही है। राज्य के 3 लाख 56 हजार नियोजित शिक्षक इस मामले पर फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
20% बढ़ोत्तरी के लिए तैयार
सरकार ने कहा जुलाई 2015 से ही शिक्षकों को वेतनमान दिया जा चुका है। 2015 में 14 और 2017 में लगभग 17 प्रतिशत शिक्षकों के वेतन में बढ़ोतरी भी हुई है। शिक्षकों की सेवा भी 60 वर्ष की गई है। इन्हें 7वां वेतन आयोग की अनुशंसा का भी लाभ मिला। इनके वर्तमान वेतन में 20 प्रतिशत बढ़ोतरी के लिए सरकार तैयार है। 2.60 लाख प्राथमिक शिक्षकों के वेतन में केंद्र सरकार से 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत राशि खर्च करती है।
सिर्फ बिहार का मामला नहीं :केंद्र की ओर से एटार्नी जनरल वेणु गोपाल ने फिर दोहराया कि यह सिर्फ बिहार का मामला नहीं है। इस तरह के मामले अन्य राज्यों से भी उठने लगेंगे। ऐसे में केंद्र सरकार पर सालाना 1.36 लाख करोड़ की अतिरिक्त राशि खर्च करनी होगी।

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