बिहार में बनी 'नेकी की दीवार', बिना किसी से पूछे जरूरतमंद ले सकेंगे अपनी जरूरत के सामान
समाज के गरीब तबके की जिंदगी कितनी मुसीबतों से गुजरती है, इसका अंदाजा लगाना हो, तो कभी सड़कों के किनारे झोपड़पट्टियों में रहनेवाले उन गरीबों को देखिए, जिन्हें कभी सुबह होने पर पेट भरने के लिए दो निवाले की चिंता सताने लगती है, तो कभी कपड़े की. इनके तन पर कपड़े तक नसीब नहीं होते.
ऐसा नहीं कि इन गरीबों को बीमारी नहीं होती. लेकिन, ना तो दवा मिल पाती है, और ना ही इनका इलाज ही हो पाता है. अक्सर लोग इनकी मदद का मन भी बनाते हैं, पर वह सही माध्यम नहीं होने के कारण मदद भी इन गरीबों तक नहीं पहुंच पाती. अधिक से अधिक मकर संक्रांति के अवसर पर ही इन गरीबों में से कुछ को किसी किसी के द्वारा कपड़ा दे दिया जाता है. लेकिन अब ऐसे गरीब,
जरूरतमंदों को कई प्रकार से सहायता मिल सकेगी. ऐसे ही जरूरतमंद और बेसहारा लोगों की मदद के लिए शहर में नेकी की दीवार बनी है. 'क्लब मधुबनी' ने इस दिशा में सराहनीय पहल शुरू की है. शहर के नगर थाने के समीप गरीब जरूरत मंदों के लिए क्लब मधुबनी ने नेकी की दीवार बनायी है. जिस पर मध्यम वर्ग और अमीर लोग अपने पुराने कपड़े और जूते-चप्पल रखेंगे और फिर गरीब जरूरतमंद उस सामान को बिना किसी से पूछे ले जायेंगे.
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